कश्मीर समस्या पर राजनीति नहीं, इंसानियत की जरूरत: अरुण पुरी

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कश्मीर समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा इन दिनों कश्मीर घाटी में मौजूद हैं और सभी पक्षों से बातचीत कर समाधान हासिल करने में लगे हुए हैं. इस बीच इसी मकसद से आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर ने ‘पैगाम-ए-मोहब्बत’ नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटर इन चीफ अरुण पुरी भी शामिल हुए और कश्मीर में हिंसा खत्म करने का मूलमंत्र भी बताया.

कश्मीर घाटी में पनपे अविश्वास के माहौल में दिलों के बीच बनी खाई को भरने कश्मीर वासियों से मेल-मिलाप को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर में मारे गए आतंकवादियों के परिजनों, शहीद सैनिकों के परिवार वालों और गोलीबारी में जान गंवा चुके स्थानीय लोगों के परिवार वालों को खासतौर पर शामिल किया गया.

कश्मीर समस्या पर बोलते हुए अरुण पुरी ने कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान तभी होगा जब राजनीति बाहर होगी और इंसानियत से वास्ता होगा.

अरुण पुरी ने कश्मीर समस्या पर मूलमंत्र देते हुए कहा, “पिछले कुछ दशकों से कश्मीर पर जो पैसा खर्च किया जा रहा है, उससे कश्मीर को स्विट्जरलैंड बन जाना चाहिए था. ना सिर्फ खूबसूरती में बल्कि संपन्नता में भी. तब कश्मीर में गरीबी नहीं होती, ना ही कोई समस्या होती. लेकिन मेरी राय में राजनीतिक की वजह से ऐसा नहीं हुआ. इसलिए राजनीति को दूर रखिए और इंसानियत को पास लाइए.”

उन्होंने कहा, “जब राजनीति आ जाती है बीच में तो लोग अपना हित देखने लगते हैं और दूसरों का हित नहीं देखते. वो अपनी वजहों से अमन नहीं चाहते, क्योंकि उनका आतंकवाद में हित सधता है. उनका हिंसा और उपद्रव में हित सधता है. इसे खत्म करना होगा. मेरी नजर में अगर इससे आगे बढ़ना है तो सियासत को खत्म करना होगा. मेरी नजर में आगे बढ़ने के लिए यह अहम है.”

अरुण पुरी ने आपसी भरोसा, लोगों की भागीदारी और लोगों में संपर्क कायम करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान में दोस्ती और गर्मजोशी का अहम योगदान है. स्वयं के हित से परे हटकर दूसरों के सुख पर जोर दिया जाना चाहिए.

उन्होंने पाकिस्तान का खासतौर पर जिक्र किया और पड़ोसी मुल्क से अपने इतिहास के जुड़ाव को एक बार फिर से यादकर लोगों से साझा किया.

अरुण पुरी ने कहा, “मैं पाकिस्तान में पैदा हुआ. मेरा माता-पिता शरणार्थी हैं. विभाजन के बाद वे पाकिस्तान से आए थे. लेकिन पाकिस्तान में अपने सभी दोस्तों के प्रति मेरे पिता के मन में जो प्यार था और उनके मन में हमारे प्रति जो भावना थी, वह कभी नहीं मरी. यानि लोगों के बीच हमेशा से गर्मजोशी है और गुरुजी (श्री श्री रविशंकर) इसी को पकड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं.”

कश्मीर हिंसा की आग में शहीद हुए सैनिकों की पत्नियों ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

आजतक से खास बातचीत में श्री श्री रविशंकर ने भी कहा कि हिंसा से कुछ हासिल होने वाला नहीं है और यह कार्यक्रम कश्मीरियों के दर्द को दूर करने की दिशा में एक शुरुआत है.

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